17 साल की बीमारी से जूझ रही युवती को मिली राहत, यथार्थ अस्पताल में आधुनिक तकनीक से सफल इलाज
ग्रेटर नोएडा। आधुनिक चिकित्सा तकनीक की मदद से 24 वर्षीय युवती को फेफड़ों के हाई प्रेशर (पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन) की गंभीर समस्या से राहत मिली है। 17 वर्षों से इस बीमारी से जूझ रही युवती का बिना ओपन सर्जरी के सफल उपचार किया गया, जिसके बाद अब उसके लिए सामान्य रूप से सांस लेना काफी आसान हो गया है।
ग्रेटर नोएडा के ओमेगा-1 स्थित यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में कार्डियक साइंसेज के चेयरमैन डॉ. वीरेश महाजन के नेतृत्व में यह जटिल प्रक्रिया सफलतापूर्वक की गई। डॉक्टरों के अनुसार पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन (PAH) एक गंभीर बीमारी है, जो आमतौर पर हृदय दोष, ऑटोइम्यून बीमारियों और फेफड़ों की समस्याओं से पीड़ित मरीजों में देखी जाती है। यह समस्या महिलाओं में अधिक पाई जाती है और समय पर उपचार न मिलने पर दाएं हृदय की विफलता या अचानक मृत्यु जैसी गंभीर जटिलताएं भी हो सकती हैं।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2008 में बचपन के दौरान युवती की हृदय संबंधी समस्या के कारण सर्जरी हुई थी, लेकिन सर्जरी में देरी के कारण उसके फेफड़ों का प्रेशर लगातार अधिक बना रहा। पिछले 17 वर्षों से वह लगातार दवाओं और नियमित उपचार पर निर्भर थी। तेज चलने जैसी साधारण गतिविधियों में भी उसे सांस फूलने लगती थी और थोड़ी मेहनत करने पर थकान महसूस होती थी।
डॉ. वीरेश महाजन ने बताया कि इतने वर्षों तक दवाओं के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं होने पर मेडिकल टीम ने उन्नत इंटरवेंशनल उपचार अपनाने का निर्णय लिया। 12 फरवरी को अस्पताल में तीन घंटे तक चली एक विशेष प्रक्रिया के जरिए बिना ओपन सर्जरी के उपचार किया गया। इस प्रक्रिया को डॉ. वीरेश महाजन और चेन्नई के डॉ. एस. गुरुप्रसाद के नेतृत्व में अंजाम दिया गया। टीम में डॉ. बिनय पांडे, डॉ. अमित कुमार, डॉ. नुपुर गोयल और डॉ. दिनकर सहित पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी और इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी के विशेषज्ञ शामिल रहे।
इलाज के दौरान आधुनिक कैथ लैब तकनीक पल्मोनरी आर्टरी नर्व डिनर्वेशन (PAND) का उपयोग किया गया। इस प्रक्रिया में बिना किसी सर्जिकल चीरे के एक पतली कैथेटर को पल्मोनरी आर्टरीज तक पहुंचाया जाता है और 3डी मैपिंग व रेडियोफ्रीक्वेंसी ऊर्जा की मदद से उन नसों को नियंत्रित किया जाता है जो फेफड़ों के प्रेशर को बढ़ाती हैं।
डॉक्टरों के अनुसार चूंकि यह ओपन सर्जरी नहीं है, इसलिए इसमें जटिलताओं का खतरा एक प्रतिशत से भी कम रहता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य दवाओं की प्रभावशीलता बढ़ाना और मरीज की जीवन गुणवत्ता में सुधार लाना है।
प्रक्रिया के बाद मरीज की स्थिति स्थिर बताई जा रही है और फेफड़ों के प्रेशर में सकारात्मक कमी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दवाओं का प्रभाव बेहतर होगा और मरीज सामान्य जीवन की ओर तेजी से लौट सकेगी।
यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में कार्डियक सर्जरी के निदेशक डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि यह तकनीक पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण है और भविष्य में इस बीमारी के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
