UPERC की जनसुनवाई में MSME उद्योगों की समस्याएं गूंजीं, NPCL की नीतियों में सुधार की उठी मांग
ग्रेटर नोएडा, 9 मार्च। Uttar Pradesh Electricity Regulatory Commission (UPERC) द्वारा आयोजित Noida Power Company Limited (NPCL) की जनसुनवाई में गौतमबुद्ध नगर के MSME उद्योगों से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। Industrial Business Association के अध्यक्ष अमित उपाध्याय ने उद्योगों की समस्याओं को रखते हुए बिजली व्यवस्था को अधिक उद्योग-अनुकूल बनाने की मांग की।
अमित उपाध्याय ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर का MSME सेक्टर हजारों लोगों को रोजगार देता है और क्षेत्र की औद्योगिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए बिजली से जुड़ी नीतियों को सरल, पारदर्शी और उद्योगों के अनुकूल बनाया जाना आवश्यक है।
जनसुनवाई के दौरान उन्होंने बताया कि वर्तमान में टेम्परेरी बिजली कनेक्शन पर लगभग ₹1900 प्रति किलोवाट का चार्ज लिया जा रहा है, जो MSME इकाइयों के लिए काफी अधिक है। उन्होंने आयोग से इस फिक्स चार्ज को कम करने की मांग की, ताकि छोटे और मध्यम उद्योगों को राहत मिल सके।
उन्होंने लोड बढ़ाने और घटाने के एग्रीमेंट शुल्क को भी अव्यावहारिक बताया। उनका कहना था कि कई उद्योगों में काम की प्रकृति के कारण समय-समय पर बिजली का लोड कम या ज्यादा करना पड़ता है। ऐसे में इस प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए और कम से कम छह माह की समय सीमा निर्धारित की जानी चाहिए, जिससे उद्योगों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े।
अमित उपाध्याय ने सिक्योरिटी डिपॉजिट में बढ़ोतरी पर भी चिंता जताई। उनके अनुसार पहले यह राशि करीब ₹2200 प्रति KVA थी, जिसे बढ़ाकर लगभग ₹3500 प्रति KVA कर दिया गया है। इससे MSME उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है, जिसे कम किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि वर्तमान में LT कनेक्शन की सीमा 50 किलोवाट है, जिसे बढ़ाकर 100 किलोवाट किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि छोटे प्लॉट वाले उद्योगों के लिए HT कनेक्शन लेना आर्थिक रूप से कठिन होता है और कई स्थानों पर इसके लिए पर्याप्त जगह भी उपलब्ध नहीं होती। यदि LT सीमा 100 किलोवाट कर दी जाए तो हजारों MSME उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा।
अंत में उन्होंने आयोग से आग्रह किया कि गौतमबुद्ध नगर के उद्योगों की इन व्यावहारिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक संशोधन किए जाएं, ताकि उद्योगों को राहत मिले और क्षेत्र के औद्योगिक विकास को नई गति मिल सके।
