यूपी का पहला सरकारी मेडिकल इनक्यूबेटर वैश्विक मंच पर, India–AI Impact Summit 2026 में GIMS की बड़ी उपलब्धि
नई दिल्ली/ग्रेटर नोएडा, 18 फरवरी 2026। Government Institute of Medical Sciences (GIMS), ग्रेटर नोएडा ने India–AI Impact Summit 2026 में उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराते हुए उत्तर प्रदेश के पहले सरकारी मेडिकल इनक्यूबेटर को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। Bharat Mandapam, नई दिल्ली में आयोजित इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में GIMS ने तीन प्रभावशाली पैनलों की मेजबानी कर सरकारी अस्पताल आधारित नवाचार मॉडल की क्षमता और प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
GIMS के Center for Medical Innovation (CMI) द्वारा संचालित यह इनक्यूबेटर एक सरकारी सेक्शन-8 कंपनी के रूप में सार्वजनिक अस्पताल के भीतर स्थापित किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मॉडल देश में अपनी तरह का पहला प्रयोग है, जिसमें क्लिनिकल वातावरण के भीतर ही अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप सहयोग को संरचित ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है।
सम्मेलन के दौरान सुरक्षित, नैतिक और मरीज-केंद्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। भारत–फ्रांस ‘इनोवेशन वर्ष’ की पृष्ठभूमि में यह प्रस्तुति और भी महत्वपूर्ण रही। फ्रांस की सौआद टेनफिश-एंसेल (CEO, LINK Co | Co-President, La French Tech India) तथा गौतियर क्लोइक्स (CEO, H Company, फ्रांस) ने पैनल चर्चाओं में भाग लेते हुए GIMS के सरकारी अस्पताल आधारित इनोवेशन मॉडल की सराहना की और इसे वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक बताया।
समिट में आयोजित पैनलों के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया गया कि AI को चिकित्सा क्षेत्र में निर्णय सहयोगी के रूप में अपनाया जाना चाहिए, न कि चिकित्सकों के प्रतिस्थापन के रूप में। “India to the World – Patient-Centric & Safe AI” शीर्षक पैनल में डॉक्टर-इन-द-लूप वैलिडेशन, नैतिक डेटा गवर्नेंस, अंतरराष्ट्रीय नियामकीय मानक तथा सुरक्षित और स्केलेबल AI समाधानों पर चर्चा हुई। वहीं “Doctors & Patients in the Era of AI” सत्र में चिकित्सकों की AI साक्षरता, संस्थागत निगरानी और मरीजों के विश्वास व सुरक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
विशेष आकर्षण रहा “GIMS AI Startup Clinic,” जिसे देश का पहला सरकारी अस्पताल आधारित AI स्टार्टअप क्लिनिक बताया गया। इस पहल के अंतर्गत SaMD (Software as a Medical Device) तथा CDSCO नियामकीय मार्गदर्शन, वास्तविक क्लिनिकल परीक्षण और सार्वजनिक अस्पतालों में तकनीकी तैनाती की संभावनाओं को सामने रखा गया।
GIMS के निदेशक ब्रिगेडियर (डॉ.) राकेश कुमार गुप्ता ने इस उपलब्धि को उत्तर प्रदेश के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि सार्वजनिक अस्पताल केवल तकनीक के उपभोक्ता नहीं, बल्कि नवाचार के निर्माता बनने चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत–फ्रांस ‘इनोवेशन वर्ष’ के दौरान अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व की उपस्थिति और मॉडल की सराहना यह दर्शाती है कि भारतीय सरकारी संस्थान नैतिक और सुरक्षित AI के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व कर सकते हैं।
CMI के CEO डॉ. राहुल सिंह ने कहा कि संस्थान ने एक संरचित, नियामक-तैयार इनक्यूबेशन मॉडल विकसित किया है, जो एक कार्यरत सरकारी अस्पताल के भीतर संचालित हो रहा है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस मॉडल की स्वीकृति यह सिद्ध करती है कि भारत जिम्मेदार और मरीज-केंद्रित हेल्थकेयर AI में विश्व नेतृत्व की क्षमता रखता है।
GIMS का यह इनोवेशन मॉडल क्लिनिकल नेतृत्व, नैतिक डेटा संरचना, नियामकीय अनुपालन और वास्तविक मरीजों पर परीक्षण जैसी विशेषताओं से युक्त है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के प्रयास सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में सुलभ, सुरक्षित और प्रभावी तकनीकी समाधानों के विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं।
इस वैश्विक प्रस्तुति के साथ उत्तर प्रदेश ने हेल्थकेयर AI इनोवेशन के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करते हुए भविष्य की चिकित्सा तकनीकों में अपनी सशक्त भागीदारी का संकेत दिया है।
