निक्की हत्याकांड: सास दया को हाईकोर्ट से जमानत, सह-आरोपियों को पहले मिल चुका लाभ
ग्रेटर नोएडा। कासना कोतवाली क्षेत्र के सिरसा गांव में चर्चित निक्की हत्याकांड मामले में आरोपी सास दया को इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने आदेश जारी करते हुए कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट नहीं होता कि घटना के समय आवेदिका मौके पर मौजूद थीं।
अदालत ने अपने आदेश में प्रत्यक्षदर्शी बयान और सीसीटीवी फुटेज का उल्लेख करते हुए माना कि ट्रायल लंबित रहने के दौरान जमानत का लाभ दिया जाना न्यायसंगत है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अमित भाटी बोड़ाकी ने दलील दी कि एफआईआर घटना के करीब 19 घंटे बाद दर्ज हुई, जबकि देरी का कोई ठोस कारण नहीं दर्शाया गया। प्रारंभिक रिपोर्ट संक्षिप्त थी और बाद में दिए गए बयानों में घटनाक्रम को विस्तार दिया गया, जो संदेह पैदा करता है।
बचाव पक्ष ने मृतका के पुत्र के बयान का हवाला देते हुए बताया कि बच्चे ने पुलिस को कहा था कि घटना के समय घर में केवल उसके माता-पिता मौजूद थे। उसके अनुसार विवाद के दौरान पिता ने तरल पदार्थ डालकर आग लगाई और मौके से फरार हो गए। बच्चे ने पूछताछ में अन्य परिजनों की मौजूदगी से इनकार किया।
सीसीटीवी फुटेज भी बहस का अहम आधार बना। अस्पताल के दृश्य में आवेदिका घायल बहू को भर्ती कराने में सहयोग करती दिखीं, जबकि पड़ोसी दुकान के कैमरे में सूचना मिलते ही उन्हें घर की ओर जाते देखा गया। बचाव पक्ष का तर्क था कि यदि दया घटना में शामिल होतीं, तो पीड़िता को अस्पताल ले जाने में मदद नहीं करतीं।
वादी पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए फरवरी 2025 की एक कथित वीडियो रिकॉर्डिंग का जिक्र किया, जिसमें सास और बहू के बीच विवाद दिखाई देने की बात कही गई। साथ ही एफआईआर में दया पर ज्वलनशील पदार्थ उपलब्ध कराने की भूमिका का आरोप दोहराया गया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि फिलहाल साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका स्पष्ट नहीं है। इन परिस्थितियों में बिना गुण-दोष पर टिप्पणी किए जमानत याचिका स्वीकार की गई। उल्लेखनीय है कि सह-आरोपी ससुर सत्वीर और जेठ रोहित को पूर्व में जमानत मिल चुकी है, जबकि मुख्य आरोपी विपिन भाटी अभी जेल में निरुद्ध हैं।
