महिला की मौत का मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा, ₹100 करोड़ मुआवज़े की मांग
नई दिल्ली / काठमांडू।
नेपाल की राजधानी काठमांडू में Gen Z Protest के दौरान भड़की हिंसक नागरिक अशांति के बीच हयात रीजेंसी होटल में एक भारतीय महिला की मृत्यु के गंभीर और अंतरराष्ट्रीय महत्व के मामले ने अब कानूनी रूप ले लिया है। इस प्रकरण को लेकर माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की गई है, जिसमें भारत सरकार, संबंधित संवैधानिक प्राधिकरणों तथा अंतरराष्ट्रीय पाँच सितारा होटल समूह हयात से ₹100 करोड़ के मुआवज़े की मांग की गई है।
यह रिट याचिका मृतका के पति रामबीर सिंह गोला द्वारा सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के अधिवक्ता अभिषेक चौधरी के माध्यम से दाखिल की गई है। याचिका में बताया गया है कि स्वर्गीय राजेश गोला, जो एक भारतीय नागरिक थीं, Gen Z Protest के दौरान नेपाल में मारी गई एकमात्र भारतीय महिला नागरिक थीं। उनकी मृत्यु काठमांडू स्थित हयात रीजेंसी होटल के भीतर हुई, जिसे याचिका में होटल प्रबंधन, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता बताया गया है।
याचिका के अनुसार, याचिकाकर्ता अपनी पत्नी के साथ 7 सितंबर 2025 को धार्मिक यात्रा के उद्देश्य से नेपाल गए थे और पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन के लिए हयात रीजेंसी काठमांडू में ठहरे थे। इसी दौरान काठमांडू में राजनीतिक विरोध और हिंसा तेजी से बढ़ रही थी, लेकिन आरोप है कि होटल प्रशासन ने वास्तविक स्थिति छुपाते हुए मेहमानों को झूठे सुरक्षा आश्वासन दिए और होटल छोड़ने से रोका। कथित रूप से बेहतर सुरक्षा का हवाला देकर उन्हें ऊपरी मंज़िल पर कमरा बदलने के लिए कहा गया।
रिट याचिका में कहा गया है कि 9 सितंबर 2025 की रात हिंसक भीड़ ने हयात होटल पर हमला कर आगजनी की, लेकिन न तो फायर अलार्म बजाया गया, न ही इवैकुएशन प्रक्रिया अपनाई गई। आरोप है कि होटल स्टाफ परिसर छोड़कर भाग गया और फंसे हुए मेहमानों को ऊपरी मंज़िलों से कूदने जैसी अमानवीय सलाह दी गई।
इस दौरान होटल में फंसे भारतीय नागरिकों द्वारा भारतीय दूतावास, काठमांडू तथा भारत सरकार के विदेश मंत्रालय को कई आपात कॉल किए गए, लेकिन याचिका के अनुसार किसी भी स्तर पर न तो कांसुलर सहायता दी गई और न ही कोई त्वरित रेस्क्यू समन्वय किया गया।
याचिका में बताया गया है कि किसी सहायता के अभाव में याचिकाकर्ता और उनकी पत्नी को जान बचाने के लिए अस्थायी रस्सियों के सहारे बाहर निकलने का प्रयास करना पड़ा। इसी दौरान स्वर्गीय राजेश गोला चौथी मंज़िल से गिर गईं और गंभीर रूप से घायल हो गईं। आरोप है कि उन्हें समय पर समुचित चिकित्सा सहायता नहीं मिली और एक स्थानीय अस्पताल में उन्हें गलत तरीके से मृत घोषित कर बिना इलाज के मुर्दाघर में छोड़ दिया गया, जिससे उनकी मृत्यु और शीघ्र हो गई। नेपाल सरकार ने इस घटना को आधिकारिक रूप से होमिसाइड के रूप में दर्ज किया है।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि 22 सितंबर 2025 को विस्तृत कानूनी नोटिस जारी किए जाने के बावजूद न तो हयात होटल प्रबंधन, न ही भारत सरकार या अन्य संबंधित प्राधिकरणों द्वारा किसी प्रकार की मुआवज़ा प्रक्रिया, जांच या जवाबदेही तय की गई।
रिट याचिका में एक गंभीर संवैधानिक प्रश्न उठाया गया है कि क्या भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त जीवन का अधिकार विदेशों में भी भारतीय नागरिकों पर लागू होता है और क्या संकट की स्थिति में कांसुलर सहायता न देना राज्य की संवैधानिक विफलता नहीं है।
याचिकाकर्ता ने दिल्ली उच्च न्यायालय से मांग की है कि इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थाओं की जवाबदेही तय की जाए तथा भारत सरकार और हयात होटल समूह को संयुक्त रूप से ₹100 करोड़ का संवैधानिक मुआवज़ा देने का निर्देश दिया जाए। याचिका में स्पष्ट किया गया है कि यह मामला किसी जनहित याचिका का नहीं, बल्कि पीड़ित परिवार द्वारा दायर प्रत्यक्ष रिट याचिका का है, जिसे विधिवत रूप से दिल्ली उच्च न्यायालय में दाखिल कर दिया गया है।
