भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन: व्यापार, सुरक्षा और हरित तकनीक में ऐतिहासिक समझौते
नई दिल्ली: दुनिया के कई हिस्सों में जारी वैश्विक तनाव के बीच भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने आज नई साझेदारी और सहयोग का एक मजबूत संदेश दिया है। 26 जनवरी 2026 को भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित 16वें भारत-ईयू शिखर सम्मेलन में दोनों पक्षों ने अपने आपसी संबंधों को नई ऊँचाई पर पहुँचाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फ़ोंडर लायन के बीच हुई व्यापक द्विपक्षीय वार्ता के बाद 13 अहम दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें सबसे बड़ा परिणाम भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता रहा, जो व्यापार और निवेश को नई गति देगा, सप्लाई चेन को मजबूत करेगा और सतत एवं समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।
इस समझौते में भारतीय किसानों को किसी भी नकारात्मक प्रभाव से बचाने के लिए कृषि क्षेत्र को पूरी तरह बाहर रखा गया है। इसके अलावा, सुरक्षा और रक्षा साझेदारी पर भी समझौता हुआ, जिसमें समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग को मजबूत किया जाएगा।
शिखर सम्मेलन में प्रवासन और गतिशीलता पर व्यापक सहयोग ढांचा भी अपनाया गया, जिससे छात्रों, शोधकर्ताओं और पेशेवरों के लिए कानूनी और सुरक्षित आवागमन के रास्ते खुलेंगे। अवैध प्रवासन से निपटने के लिए भी सहयोग बढ़ाया जाएगा।
‘भारत-ईयू संयुक्त व्यापक रणनीतिक एजेंडा 2030’ को अपनाया गया, जो आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय सहयोग की दिशा तय करेगा। जलवायु परिवर्तन और हरित तकनीक के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण पहल हुई, जिसमें ग्रीन हाइड्रोजन टास्क फोर्स के गठन और स्वच्छ ऊर्जा सहयोग को बढ़ावा देने पर सहमति बनी।
साथ ही, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्वांटम तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया। इस ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन ने भारत और यूरोपीय संघ को भरोसेमंद और दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार के रूप में स्थापित किया।
