ईपीसीएच भारत–ईयू एफटीए के महत्वपूर्ण पड़ाव की ओर आशान्वित
नई दिल्ली/एनसीआर, 24 जनवरी 2026: एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स (ईपीसीएच) भारत–यूरोपीय संघ (ईयू) फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) के संभावित हस्ताक्षर को लेकर उत्साहित है। यह समझौता 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ के साथ भारत के व्यापार एवं बाजार पहुँच ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने कहा, “हमें उम्मीद है कि भारत–ईयू एफटीए यूरोप में भारतीय हस्तशिल्प के लिए अधिक सशक्त, पूर्वानुमेय और सुविधाजनक बाजार उपलब्ध कराएगा। इससे हमारे निर्यातक आत्मविश्वास के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। यह एमएसएमई-आधारित कारीगरों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जहां वास्तविक लागत केवल टैरिफ तक सीमित नहीं, बल्कि अनुपालन, दस्तावेज़ीकरण और प्रक्रियागत जटिलताओं से जुड़ी होती है।”
डॉ. खन्ना ने आगे कहा, “यूरोपीय खरीदार अब प्रामाणिकता, स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी), डिज़ाइन की गहराई और मजबूत स्टोरीटेलिंग की तलाश में हैं, जो ‘इंडिया हैंडमेड’ स्वाभाविक रूप से प्रस्तुत करता है। अंतरराष्ट्रीय डिज़ाइन प्लेटफॉर्म ‘मैसों ऐंड ऑब्जे, पेरिस’ में हालिया भागीदारी के दौरान भारतीय हस्तनिर्मित होम, लाइफस्टाइल और डेकोर उत्पादों के लिए उत्साहजनक प्रतिक्रिया देखने को मिली। बेहतर व्यापार ढांचे के साथ यह रुचि उच्च मूल्य वाले ऑर्डर्स, दीर्घकालिक साझेदारियों और भारतीय कारीगरों की वैश्विक पहचान को मजबूत करेगी।”
हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद देश में हस्तशिल्प के निर्यात को बढ़ावा देने और शिल्प क्लस्टर्स में लगे लाखों कारीगरों एवं शिल्पकारों के हुनर को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने के लिए काम करती है। साल 2024–25 में भारत का कुल हस्तशिल्प निर्यात ₹33,123 करोड़ (3,918 मिलियन अमेरिकी डॉलर) रहा।
ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक श्री राजेश रावत ने बताया कि वर्ष 2024–25 में भारत का ईयू निर्यात ₹7,309.72 करोड़ (US$ 864.28 मिलियन) रहा, जिसमें रुपये के आधार पर 8.30% और डॉलर के आधार पर 6.02% की वृद्धि दर्ज की गई।
इस एफटीए से भारतीय हस्तशिल्प को यूरोप में अधिक प्रतिस्पर्धात्मक, सुलभ और प्रामाणिक बाजार मिलने की उम्मीद है, जिससे ‘इंडिया हैंडमेड’ की वैश्विक प्रतिष्ठा और मजबूत होगी।
