इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में रजिस्ट्रार बने रहेंगे डा. विश्वास त्रिपाठी
ग्रेटर नोएडाः गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) में शिक्षक भर्ती और छात्रों की फीस धांधली के आरोपों का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। पीड़ित महिला की शिकायत के आधार पर लोकायुक्त ने कुलपति और पूर्व कुलसचिव से जवाब मांगा था। जवाब तलब करने के बाद कुलपति ने कुलसचिव के पद से डा. विश्वास त्रिपाठी को हटा दिया था। पद से हटाए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए डा. विश्वास त्रिपाठी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। मामले में सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कुलपति की ओर से पारित आदेश को असंवैधानिक मानते हुए निरस्त कर दिया और डा. विश्वास त्रिपाठी को दोबारा पद सौंपे जाने का फैसला सुनाया।
बता दें कि जीबीयू के कुलपति प्रोफेसर राणा प्रताप सिंह ने 29 दिसंबर को आदेश जारी करते हुए रजिस्ट्रार डा. विश्वास त्रिपाठी को पद से कार्यमुक्त कर दिया था। रजिस्ट्रार डा. विश्वास त्रिपाठी ने कुलपति के आदेश को इलाहाबाद हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कुलपति द्वारा रजिस्ट्रार को कार्य मुक्त करने के लिए निर्गत आदेश से संबंधित विधिक प्रविधान प्रस्तुत करने में विश्वविद्यालय अक्षम रहा। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने की। हाई कोर्ट में जीबीयू का पक्ष उत्तर प्रदेश के अपर महाधिवक्ता द्वारा रखा गया। डा. विश्वास त्रिपाठी के तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता वीके सिंह ने पक्ष रखा।
डा. विश्वास त्रिपाठी का कहना था कि उनको आशंका है कि इस आदेश के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा प्रताड़ित किया जाएगा। इस पर अपर महाधिवक्ता ने शासन और विश्वविद्यालय का पक्ष रखते हुए न्यायालय को आश्वस्त किया और कहा कि किसी प्रकार से प्रताड़ित नहीं किया जाएगा।
