शारदा यूनिवर्सिटी में गूंजा पशु व वन्य जीवन संरक्षण का वैश्विक विमर्श
दो दिवसीय हाइब्रिड अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य समापन
ग्रेटर नोएडा, 17 जनवरी। Sharda University में घरेलू जानवरों और वन्य जीवन संरक्षण से जुड़े कानूनी, नैतिक और नीतिगत पहलुओं पर केंद्रित दो दिवसीय हाइब्रिड अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। “घरेलू जानवरों और वन्य जीवन संरक्षण के कानूनी ढांचे और नीतियों की अवधारणा: मुद्दे और चुनौतियाँ” विषयक यह सम्मेलन 16 जनवरी को उद्घाटन और 17 जनवरी को समापन समारोह के साथ संपन्न हुआ।
सम्मेलन में देश-विदेश के विद्वानों, न्यायविदों, नीति निर्माताओं, पर्यावरणविदों, पशु कल्याण कार्यकर्ताओं और विद्यार्थियों ने भाग लेकर पशु क्रूरता, वन्य जीवन अपराध, आवासीय क्षरण, जलवायु परिवर्तन और मानव–पशु संघर्ष जैसी ज्वलंत चुनौतियों पर गंभीर मंथन किया। वक्ताओं ने प्रभावी कानूनों, मजबूत प्रवर्तन तंत्र और अंतरविषयक सहयोग की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
उद्घाटन सत्र में विचार व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष एवं प्रो-चांसलर वाई. के. गुप्ता ने कहा कि घरेलू जानवरों और वन्य जीवन की सुरक्षा केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी भी है। ऐसे अकादमिक मंच सहानुभूति, स्थिरता और मानव–पशु सह-अस्तित्व को सुदृढ़ करने वाली नीतियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Sharda School of Law के डीन प्रोफेसर (डॉ.) ऋषिकेश डेव ने कहा कि पशु और वन्य जीवन संरक्षण से जुड़े प्रश्न अब केवल पर्यावरणीय मुद्दे नहीं रहे, बल्कि संवैधानिक और मानवाधिकार विमर्श का भी अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। यह सम्मेलन छात्रों और शोधकर्ताओं को कानून को अधिक मानवीय दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान करता है।
हंगरी के कारोली गास्पार विश्वविद्यालय के वाइस रेक्टर प्रोफेसर (डॉ.) रॉबर्ट सुकी ने शिक्षा और अनुसंधान के माध्यम से पर्यावरण एवं पशु संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने की आवश्यकता रेखांकित की और इसे समाज के प्रति उत्तरदायी नेतृत्व विकसित करने की दिशा में अहम बताया।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि, प्रसन्ना भालचंद्र वराले ने कहा कि घरेलू जानवरों और वन्य जीवन की सुरक्षा हमारे संवैधानिक मूल्यों, पारिस्थितिक संतुलन और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। नीति-उन्मुख और व्यावहारिक समाधान विकसित करने में ऐसे अकादमिक मंचों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
समापन समारोह में सम्मेलन की प्रमुख चर्चाओं और अकादमिक निष्कर्षों का सार प्रस्तुत किया गया। प्रतिभागियों ने इसे पशु संरक्षण और वन्य जीवन सुरक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान, नीति संवाद और जन-जागरूकता को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण प्रयास बताया।
इस अवसर पर इंडियन लॉ इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) वी. के. आहुजा सहित प्रोफेसर (डॉ.) भूपिंदर सिंह, प्रोफेसर (डॉ.) राहुल जे. निकम, प्रोफेसर (डॉ.) तारकेश मोलिया, डॉ. रज़िया चौहान, डॉ. अक्सा फातिमा, स्वर्णिमा गौरानी तथा शारदा स्कूल ऑफ लॉ के संकाय सदस्य, विभिन्न विभागों के डीन, विभागाध्यक्ष, शोधकर्ता और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
