किसान-मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरी अखिल भारतीय किसान सभा, कलेक्ट्रेट पर सौंपा ज्ञापन
ग्रेटर नोएडा। अखिल भारतीय किसान सभा ने किसानों और मजदूरों से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को लेकर ट्रेड यूनियन संगठनों के साथ मिलकर बुधवार को कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान सैकड़ों किसानों-मजदूरों ने केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में नारेबाजी करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।
सुबह 11 बजे कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित इस प्रदर्शन में किसान सभा की जिला कमेटी के साथ-साथ विभिन्न ग्राम कमेटियों और ट्रेड यूनियनों के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। प्रदर्शन के बाद किसान सभा के प्रतिनिधिमंडल ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी से मुलाकात कर किसानों की लंबित समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग रखी।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान सभा के जिला अध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने कहा कि मोदी सरकार ने नरेगा कानून में बदलाव कर मजदूरों के कानूनी अधिकारों को कमजोर किया है। पहले नरेगा मांग-आधारित योजना थी, जिसमें केंद्र सरकार का 80 प्रतिशत और राज्य सरकार का 20 प्रतिशत योगदान होता था तथा बजट की कोई सीमा नहीं थी। अब इसे पूर्ति-आधारित योजना बनाकर केंद्र का योगदान घटाकर 60 प्रतिशत और राज्यों का हिस्सा 40 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के सबसे गरीब मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला हुआ है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार बीज विधेयक लाकर किसानों से बीज बचाने और अगली फसल बोने के उनके पुश्तैनी अधिकार खत्म करना चाहती है, ताकि किसान कंपनियों से बीज खरीदने को मजबूर हों। बिजली विधेयक में संशोधन कर बिजली को महंगा किया जा रहा है, जिससे यह किसानों की पहुंच से बाहर होती जा रही है। चार लेबर कोड लागू कर ‘हायर एंड फायर’ की नीति लाई गई है, मजदूरों के काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 कर दिए गए हैं और यूनियन बनाने के अधिकारों में कटौती की गई है।
किसान सभा के संयोजक वीर सिंह नागर ने कहा कि यह सरकार किसान-मजदूर विरोधी है और केवल पूंजीपतियों के हित में काम कर रही है। गौतम बुद्ध नगर में पिछले 11 वर्षों से सर्किल रेट नहीं बढ़ा है। किसानों की जमीन ₹4000 प्रति वर्ग मीटर में लेकर ₹1,00,000 प्रति वर्ग मीटर तक बेची जा रही है। किसानों की आबादियां वर्षों से लंबित हैं, 10 प्रतिशत के प्लॉट नहीं दिए गए हैं और नया कानून भी लागू नहीं किया गया है।
किसान सभा के उपाध्यक्ष गबरी मुखिया ने बताया कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी से हुई बातचीत में 6 प्रतिशत प्लॉट विकसित करने और किसानों की आबादियों के निस्तारण पर सहमति बनी है। इसके लिए 21 जनवरी को 15 गांवों की आबादियों का निस्तारण करने का आश्वासन दिया गया है। साथ ही मुआवजा वृद्धि का प्रस्ताव आगामी बोर्ड बैठक में ले जाने का भरोसा भी दिलाया गया है।
किसान सभा के सचिव गुरप्रीत एडवोकेट ने कहा कि यदि तय तिथि पर किसानों की आबादियों का निस्तारण नहीं किया गया तो किसान सभा बड़े पैमाने पर आंदोलन करेगी।
प्रदर्शन और पंचायत में सतीश यादव, सूले यादव, बुधपाल यादव, राहुल नागर, नितिन चौहान, देवराज नागर, सोनू समानिया, महेश प्रजापति, निरंकार प्रधान, प्रशांत भाटी, अमित भाटी, सतीश गोस्वामी, राहुल गोस्वामी, जोगिंदर प्रधान, गौरव यादव, निशांत रावल, भोजराज रावल, सुधीर रावल, सुशील सुनपुरा, यतेंद्र सुनपुरा, नरेश सैनी, करतार नागर सहित सैकड़ों किसान-मजदूर उपस्थित रहे।
