यथार्थ हॉस्पिटल नोएडा एक्सटेंशन ने किया बिना चीरे के गले की दुर्लभ बीमारी का सफल इलाज

न कोई चीरा, न कोई निशान: ज़ेड-पीओईएम की प्रक्रिया ज़ेन्कर डायवर्टिकुलम के लिए वरदान

दो वर्षों तक दुर्लभ गले की बीमारी से जूझता रहा मरीज

यथार्थ अस्पताल नोएडा एक्सटेंशन में नोएडा की पहली Z-POEM सर्जरी, दुर्लभ गले की बीमारी का स्कार-लेस इलाज संभव

नोएडा: 15 जनवरी 2025: नोएडा एक्सटेंशन स्थित यथार्थ अस्पताल ने चिकित्सा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यहां गले की एक बेहद दुर्लभ बीमारी जेंकर डायवर्टिकुलम का बिना चीरा लगाए सफल इलाज किया गया। यह बीमारी करीब 5 लाख लोगों में से सिर्फ 1 व्यक्ति को होती है, जिसमें गले के पीछे एक थैली बन जाती है, जिसमें खाना फंसने लगता है।

इस समस्या के कारण मरीज को खाना निगलने में परेशानी, खाना वापस आना, बार-बार गला साफ करने की जरूरत, मुंह से बदबू, वजन कम होना और गर्दन में अजीब गड़गड़ाहट जैसी आवाज आने लगती है। धीरे-धीरे मरीज की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगती है।

यथार्थ अस्पताल में इस बीमारी का इलाज ज़ेड-पीओईएम (Z-POEM) तकनीक से किया गया, जो एक आधुनिक और पूरी तरह बिना चीरे की एंडोस्कोपिक प्रक्रिया है। इस तकनीक में मुंह के रास्ते एक पतली दूरबीन डालकर अंदर मौजूद उस मांसपेशी को काटा जाता है, जो खाने के रास्ते में रुकावट पैदा करती है। बाहर से शरीर पर कोई कट, टांके या निशान नहीं पड़ता।

*यह नोएडा में ज़ेड-पीओईएम (ज़ेन्कर्स पर ओरल एन्डोस्कोपिक मायोटोमी) की पहली सफल प्रक्रिया है, जिसे यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल्स के ग्रुप डायरेक्टर – गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डॉ. कपिल शर्मा ने किया।* मरीज पिछले दो वर्षों से लगातार निगलने में दिक्कत, खाना वापस आना, मुंह से बदबू और वजन कम होने जैसी समस्याओं से जूझ रहा था। कई जगह इलाज कराने के बावजूद बीमारी का सही पता नहीं चल पाया। जांच के बाद जेंकर डायवर्टिकुलम की पुष्टि हुई और मरीज को बड़ी सर्जरी की सलाह दी गई, जिसमें ज्यादा जोखिम और लंबा आराम शामिल था।

डॉ. कपिल शर्मा ने बिना बड़ी सर्जरी के ज़ेड-पीओईएम तकनीक से मरीज का सफल इलाज किया। प्रक्रिया के कुछ ही घंटों में मरीज को आराम मिलने लगा। अगले दिन से तरल भोजन और तीन दिन के भीतर सामान्य भोजन शुरू कर दिया गया।

इस मौके पर डॉ. कपिल शर्मा ने कहा, “ज़ेड-पीओईएम तकनीक ने जेंकर डायवर्टिकुलम जैसे जटिल रोग के इलाज को बेहद आसान बना दिया है। अब मरीजों को बड़ी सर्जरी, ज्यादा दर्द सहने और लंबे समय तक अस्पताल में रहने की जरूरत नहीं पड़ती। सही समय पर पहचान और आधुनिक तकनीक से मरीज तेजी से सामान्य जीवन में लौट सकता है।”

यथार्थ अस्पताल में हमारा उद्देश्य मरीजों को कम से कम तकलीफ के साथ विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवाएं प्रदान करना है। बिना चीरे की एंडोस्कोपिक तकनीकों का सफल उपयोग नवाचार और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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