महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक-सप्ताह समारोह में ले.जनरल योगेंद्र डिमरी का प्रेरक संबोधन
गोरखपुर, 4 दिसंबर। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक-सप्ताह समारोह 2025 का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, लेफ्टिनेंट जनरल योगेंद्र डिमरी (से.नि.) शामिल हुए।
मुख्य अतिथि का संदेश
अपने संबोधन में ले.जनरल डिमरी ने कहा कि देशभक्ति केवल सीमा पर साहस दिखाना ही नहीं है, बल्कि ईमानदारी से कर्तव्य पालन करना, पर्यावरण संरक्षण, लोक कल्याण और अच्छा नागरिक बनना ही वास्तविक राष्ट्रसेवा है। उन्होंने छात्रों को महाराणा प्रताप के जीवन से अनुशासन, साहस, समर्पण और प्रतिबद्धता के मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
उन्होंने अंग्रेजी शासन और स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान भारतीय मूल्यों पर आधारित शिक्षण संस्थानों की स्थापना को सच्ची राष्ट्रसेवा बताया। डिमरी ने 1916 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय और 1932 में गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना को भारतीयता और राष्ट्रभक्ति का अद्वितीय उदाहरण कहा। साथ ही संस्थापक महंत दिग्विजय नाथ, राष्ट्र संत महंत अवेद्यनाथ और वर्तमान संरक्षक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के योगदान को नमन किया।
छात्रों के लिए प्रेरणा
- छात्रों को न्यायालयीन अनुशासन और जीवन में कर्तव्यपालन को सर्वोपरि मानने की सलाह दी।
- प्रतियोगिताओं में भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि हार और जीत निर्णायक नहीं, बल्कि प्रयास ही सफलता का मार्ग है।
- उन्होंने सचिन तेंदुलकर के जीवन और भगवद्गीता के श्लोक “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन” का उदाहरण देकर परिणाम की चिंता किए बिना कर्तव्यपालन को सर्वोत्तम बताया।
- तेजी से बदलती तकनीक, एआई और रोबोटिक्स के प्रति छात्रों को सजग रहने का आह्वान किया।
निष्कर्ष
ले.जनरल डिमरी ने कहा कि विजय मैदान में नहीं, बल्कि मन और संस्कारों में होती है। शक्ति हथियारों में नहीं, बल्कि चरित्र और मूल्यों में निहित है। उनका संदेश छात्रों के लिए अनुशासन, ईमानदारी और समर्पण को जीवन की सफलता की कुंजी के रूप में प्रस्तुत करता है।
