यू.पी. रेरा की पहल: शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया में भ्रम दूर, फॉर्म “एम” और “एन” का अंतर अब होगा स्पष्ट
लखनऊ / ग्रेटर नोएडा। दिनांक: 29 अक्टूबर 2025
गृह-खरीदारों की सुविधा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (यू.पी. रेरा) ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। प्राधिकरण ने शिकायत दर्ज करने के लिए उपयोग में आने वाले फॉर्म “एम” और फॉर्म “एन” के बीच स्पष्ट अंतर बताते हुए आम जनता के हित में स्पष्टीकरण जारी किया है।
यू.पी. रेरा ने बताया कि रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 31 के तहत कोई भी प्रभावित व्यक्ति—चाहे वह गृह-खरीदार हो, प्रमोटर या आलॉटियों का संघ—अधिनियम के उल्लंघन से संबंधित शिकायत दर्ज कर सकता है। शिकायत दर्ज करने के लिए दो फॉर्म निर्धारित किए गए हैं: फॉर्म ‘एम’ और फॉर्म ‘एन’, जिनका चयन शिकायत के प्रकार पर निर्भर करेगा।
🔸 फॉर्म “एम” — रिफंड, कब्जा या देरी पर ब्याज से जुड़ी शिकायतें
यह फॉर्म सीधे यू.पी. रेरा प्राधिकरण के समक्ष दाखिल किया जाता है।
इस फॉर्म के अंतर्गत गृह-खरीदार, आलॉटियों का संघ (AOA) या प्रमोटर निम्न मुद्दों पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं —
धनवापसी (Refund)
कब्जा देने में देरी या रजिस्ट्री न होना
बिल्डर-बायर एग्रीमेंट का उल्लंघन
परियोजना में देरी या लेआउट परिवर्तन
सुविधाओं (जैसे जिम, क्लब, स्विमिंग पूल, बिजली, जल निकासी आदि) से जुड़ी शिकायतें
इन शिकायतों की सुनवाई रेरा प्राधिकरण के पीठासीन अधिकारी द्वारा की जाती है।
🔸 फॉर्म “एन” — क्षतिपूर्ति (Compensation) से जुड़ी शिकायतें
यह फॉर्म केवल निर्णय अधिकारी (Adjudicating Officer) के समक्ष दाखिल किया जाता है।
यह विशेष रूप से अधिनियम की धाराओं 12, 14, 18 और 19 से संबंधित मामलों में लागू होता है, जैसे —
प्रमोटर द्वारा गलत या भ्रामक जानकारी देना
स्वीकृत नक्शे या विनिर्देशों का पालन न करना
कब्जा न देने से नुकसान या क्षति
आलॉटी के अधिकारों का उल्लंघन
इन शिकायतों में केवल क्षतिपूर्ति की मांग की जा सकती है, न कि रिफंड या ब्याज की।
🔸 शुल्क और प्रक्रिया
दोनों फॉर्मों के लिए ₹1,000 का नाममात्र शुल्क तय किया गया है, जो ऑनलाइन या डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से जमा किया जा सकता है।
शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया अब पूर्णतः ऑनलाइन है। इच्छुक व्यक्ति www.up-rera.in पर लॉगिन या पंजीकरण कर संबंधित फॉर्म चुन सकते हैं, आवश्यक दस्तावेज़ अपलोड कर शुल्क जमा कर सकते हैं और प्राप्त संख्या के माध्यम से अपनी शिकायत की स्थिति देख सकते हैं।
🔸 यू.पी. रेरा अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी का बयान
यू.पी. रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा,
> “रेरा रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। शिकायत निस्तारण की दक्षता के लिए फॉर्म ‘एम’ और ‘एन’ का अंतर समझना बेहद आवश्यक है। फॉर्म ‘एम’ रिफंड, कब्जा या देरी पर ब्याज के मामलों के लिए है, जबकि फॉर्म ‘एन’ क्षतिपूर्ति से जुड़े मामलों में उपयोग होता है। हमारा उद्देश्य है कि हर शिकायत का त्वरित और निष्पक्ष निस्तारण हो, ताकि गृह-खरीदारों का विश्वास और अधिक मजबूत बने।”
यू.पी. रेरा की यह पहल गृह-खरीदारों को न केवल कानूनी प्रक्रिया की सही जानकारी प्रदान करेगी, बल्कि शिकायत निस्तारण को अधिक पारदर्शी और परिणामकारी बनाने में भी मददगार साबित होगी।
