GD गोयनका पब्लिक स्कूल में साइबर सुरक्षा पर विस्तृत जागरूकता सत्र

  • छात्रों को सिखाई गई डिजिटल सुरक्षा की बारीकियाँ, साइबर बीमा और ऑनलाइन खतरे से सतर्क रहने के उपाय

ग्रेटर नोएडा, स्वर्ण नगरी
GD गोयनका पब्लिक स्कूल में  कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए एक विशेष साइबर अपराध और साइबर सुरक्षा जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। बदलते डिजिटल युग में इंटरनेट उपयोग की बढ़ती प्रवृत्ति और उससे जुड़ी जोखिमों को ध्यान में रखते हुए यह सत्र अत्यंत प्रासंगिक और आवश्यक सिद्ध हुआ।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों को यह समझाना था कि साइबर अपराध क्या होता है, यह किन-किन रूपों में सामने आता है, और इससे बचाव कैसे संभव है। सत्र की शुरुआत छात्रों को साइबर खतरों की प्रकृति और उनके दुष्परिणामों की जानकारी देने से हुई।

साइबर खतरों के प्रमुख उदाहरणों में शामिल थे:

  • पहचान की चोरी (Identity Theft)
  • डेटा हैकिंग और फिशिंग अटैक
  • अश्लील सामग्री वाली वेबसाइटें और अनैतिक लिंक
  • ईमेल एवं सोशल मीडिया के माध्यम से फैलने वाली ठगी योजनाएँ
  • वायरस और मैलवेयर हमले

छात्रों को सिखाए गए प्रमुख सुरक्षा उपाय:

  • मजबूत पासवर्ड बनाना और उसे नियमित रूप से बदलना
  • अपने सॉफ़्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम को अपडेट रखना
  • मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) को सक्रिय करना
  • सार्वजनिक वाई-फाई के प्रयोग में सतर्कता
  • एंटीवायरस और एंटी-मैलवेयर टूल्स का नियमित उपयोग
  • अज्ञात लिंक और ईमेल अटैचमेंट्स से दूरी बनाना
  • व्यक्तिगत जानकारी इंटरनेट पर साझा करते समय संयम बरतना

बच्चों की डिजिटल सुरक्षा की ओर एक कदम – साइबर बीमा:
इस सत्र में बताया गया कि माता-पिता बच्चों की सुरक्षा के लिए साइबर बीमा का सहारा भी ले सकते हैं, जिससे किसी संभावित डिजिटल नुकसान की भरपाई की जा सके।

साइबर अपराध होने पर क्या करें:
छात्रों को बताया गया कि साइबर अपराध का शिकार होने की स्थिति में वे www.cybercrime.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त वे अपने नजदीकी साइबर क्राइम सेल या पुलिस स्टेशन में भी रिपोर्ट दर्ज करा सकते हैं।

कार्यक्रम का निष्कर्ष:
सत्र के अंत में छात्रों ने न केवल साइबर खतरों की विविधता को समझा, बल्कि यह भी सीखा कि डिजिटल जीवन में सतर्क और जिम्मेदार रहकर कैसे स्वयं को और अपने डिवाइस को सुरक्षित रखा जा सकता है। स्कूल प्रशासन और शिक्षकों ने इस पहल को भविष्य की पीढ़ी को डिजिटल रूप से सशक्त और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास बताया।

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