आईएफजेएएस 2025: शिल्प, सौंदर्य और सततता का संगम, श्रेष्ठ प्रदर्शनकर्ताओं को मिला सम्मान
ग्रेटर नोएडा/दिल्ली एनसीआर | 5 जुलाई 2025 – इंडिया एक्सपो सेंटर में चल रहे 19वें इंडियन फैशन जूलरी ऐंड एक्सेसरीज शो (आईएफजेएएस) के दूसरे दिन का माहौल बेहद खास और जोश से भरपूर रहा। इस दिन न केवल रैंप पर रचनात्मकता की झलक देखने को मिली, बल्कि बेहतरीन प्रदर्शनकर्ताओं को सम्मान और पुरस्कार भी प्रदान किए गए, जिसने प्रतिभागियों और दर्शकों दोनों को उत्साहित कर दिया।
गरिमामयी मौजूदगी, प्रभावी आयोजन
इस भव्य आयोजन की शोभा बढ़ाई एमएसएमई मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री मर्सी एपाओ ने, जो बतौर मुख्य अतिथि समारोह में शामिल हुईं। उनके साथ मंच पर मौजूद रहे ईपीसीएच के महानिदेशक श्री नीरज खन्ना, आईईएमएल के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार, आईएफजेएएस अध्यक्ष श्री जे पी सिंह और उपाध्यक्ष श्री मोहम्मद रईस। इसके अलावा ईपीसीएच की प्रशासनिक समिति के कई सम्मानित सदस्य और खरीदारों की अंतरराष्ट्रीय टीम भी समारोह में मौजूद रही।
प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन
आईएफजेएएस 2025 में करीब 200 प्रदर्शकों ने भाग लिया, जहां देशभर से आए शिल्पकारों और डिज़ाइनर्स ने अपने विशिष्ट और खूबसूरत उत्पादों को प्रदर्शित किया। रैंप पर आयोजित प्रस्तुतियों में उनके तैयार किए गए आभूषणों और फैशन एक्सेसरीज़ की भव्यता और रचनात्मकता ने हर किसी का ध्यान आकर्षित किया।
ईपीसीएच अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने कहा,
“भारत की सांस्कृतिक विविधता ने आईएफजेएएस को वैश्विक स्तर पर एक खास पहचान दी है। यहाँ कई ऐसे शिल्प और डिज़ाइन्स देखने को मिले जो पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को आधुनिक रंग में प्रस्तुत करते हैं।”
पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों की सराहना
इस वर्ष मेले की एक खास बात रही – सस्टेनेबल उत्पादों की झलक। बांस से बनी जूलरी, जूट व कॉटन से बने फैशन एक्सेसरीज़, रीसायकल डेनिम, हाथ से पेंट किए वस्त्र, और कागज़ व पौधों के रेशों से बनाए गए बैग्स जैसी रचनाओं को व्यापक सराहना मिली।
ईपीसीएच उपाध्यक्ष सागर मेहता ने ज़ोर दिया कि,
“ईपीसीएच हरित निर्माण और नैतिक आपूर्ति शृंखलाओं की दिशा में गंभीर प्रयास कर रहा है। यह शो न केवल डिज़ाइनों को प्रदर्शित करता है, बल्कि एक टिकाऊ भविष्य की ओर कदम बढ़ाने की प्रेरणा भी देता है।”
अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की भागीदारी
शो में आए विदेशी खरीदारों ने भी भारतीय शिल्प की जमकर तारीफ की। स्पेन के गोंजालो प्लाजास डियाज ने कहा,
“यहाँ उत्पादों की मौलिकता और गुणवत्ता मुझे बार-बार भारत खींच लाती है। मुझे बहुत से नए आपूर्तिकर्ता मिले हैं जो मेरे ब्रांड के लिए एकदम उपयुक्त हैं।”
वहीं दक्षिण अफ्रीका की लिजेल ओल्कर्स ने कहा,
“भारतीय डिज़ाइनों की विविधता और शिल्पकारों की आत्मीयता इसे एक यादगार अनुभव बना देती है।”
निर्यात में दमदार वृद्धि
ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक आर. के. वर्मा ने बताया कि,
“वर्ष 2024-25 के दौरान भारत का कुल हस्तशिल्प निर्यात ₹33,123 करोड़ (USD 3,918 मिलियन) तक पहुँचा, जिसमें से फैशन जूलरी और एक्सेसरीज की हिस्सेदारी ₹6,252 करोड़ (USD 739 मिलियन) रही। यह पिछले वर्ष की तुलना में 7.92% (रुपये में) की वृद्धि दर्शाती है।”
उन्होंने आगे बताया कि यह शो भारतीय शिल्प उद्योग के लिए वैश्विक मंच तैयार करता है और लाखों कारीगरों की प्रतिभा को वैश्विक खरीदारों तक पहुंचाने में सहायक है।
