आईएफजेएएस 2025: भारत की फैशन जूलरी और एक्सेसरीज का वैश्विक मंच, 4 से 6 जुलाई को ग्रेटर नोएडा में
ग्रेटर नोएडा, 03 जुलाई 2025 — हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) द्वारा आयोजित 19वां इंडियन फैशन जूलरी एंड एक्सेसरीज शो (आईएफजेएएस 2025) 4 से 6 जुलाई तक इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट, ग्रेटर नोएडा में आयोजित किया जा रहा है। यह बी2बी शो भारत की फैशन जूलरी और एक्सेसरीज के क्षेत्र में वैश्विक खरीदारों के लिए एक प्रमुख सोर्सिंग प्लेटफॉर्म बन गया है।
प्रदर्शनी की विशेषताएं:
- 200 से अधिक प्रदर्शक: देशभर के छोटे-मझोले निर्यातक, शिल्पकार, उद्यमी और प्रतिष्ठित उत्पादक भाग ले रहे हैं।
- विस्तृत उत्पाद श्रेणियां: फैशन जूलरी, फुटवियर, परिधान, टेक्सटाइल एक्सेसरीज, बैग्स, लेदर गुड्स, ब्यूटी और ग्रूमिंग उत्पाद, हेयर एक्सेसरीज आदि।
- थीम प्रदर्शनी ‘डिज़ाइन फॉर बिजनेस’: उभरते और स्थापित डिजाइनरों की अभिनव कृतियों का प्रदर्शन।
- स्थायी शोरूम और मार्ट्स: आगंतुकों को प्रमुख निर्यातकों के स्थायी शोरूम में जाने की सुविधा।
अंतरराष्ट्रीय भागीदारी:
इस वर्ष 40 से अधिक देशों के खरीदारों की भागीदारी की संभावना है, जिनमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया, रूस, सऊदी अरब, स्पेन, इजिप्ट, कोलंबिया आदि शामिल हैं। कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने पहले ही अपनी उपस्थिति की पुष्टि कर दी है।
भारतीय खुदरा क्षेत्र की भागीदारी:
भारत के प्रमुख ब्रांड जैसे अरविंद ग्रुप, रिलायंस रिटेल, शॉपर्स स्टॉप, बाटा, मिनिसो, जेपोर, फर्न्स एन पेटल्स आदि भी शो में शामिल हो रहे हैं। यह आयोजन उन्हें अंतरराष्ट्रीय डिजाइनों और प्रीमियम उत्पादों की सोर्सिंग का अवसर प्रदान करता है।
निर्यात और उद्योग की स्थिति:
वर्ष 2024-25 में भारत से हस्तशिल्प निर्यात ₹33,123 करोड़ रहा, जिसमें फैशन जूलरी और एक्सेसरीज का योगदान ₹6,252 करोड़ रहा — पिछले वर्ष की तुलना में 7.92% की वृद्धि।
आयोजकों की राय:
- डॉ. नीरज खन्ना (अध्यक्ष, ईपीसीएच): “भारतीय फैशन जूलरी उद्योग की ताकत इसकी अनुकूलनशीलता और रचनात्मकता है।”
- डॉ. राकेश कुमार (अध्यक्ष, आईईएमएल): “यह शो पारंपरिक कला और आधुनिक डिज़ाइन का सुंदर मेल है।”
- जे. पी. सिंह (मेला अध्यक्ष): “आईएफजेएएस जैसे आयोजन निर्यातकों को वैश्विक खरीदारों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं।”
- आर. के. वर्मा (कार्यकारी निदेशक, ईपीसीएच): “यह शो भारत की शिल्प विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करता है।”
यह आयोजन न केवल व्यापारिक अवसरों को बढ़ावा देगा, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और शिल्प कौशल को भी वैश्विक पहचान दिलाएगा।
