योगी सरकार की पंचगव्य योजना: जैविक खेती से ग्रामीण विकास और रोजगार को मिलेगा नया आयाम
लखनऊ, 2 जुलाई: उत्तर प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार ने एक व्यापक और दूरगामी योजना तैयार की है। इस योजना के अंतर्गत राज्य के सभी 75 जिलों में ग्रोथ प्रमोटर और ऑर्गेनिक पेस्टिसाइड के उपयोग की शुरुआत की जाएगी। पंचगव्य— यानी गोबर, गोमूत्र, दूध, दही और घी से बने उत्पादों— को केंद्र में रखकर यह पहल कृषि सुधार, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण रोजगार के तीनों क्षेत्रों में अहम भूमिका निभाएगी।
पंचगव्य से होगी फसल सुरक्षा और उत्पादन में वृद्धि
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इन नवाचारों से फसलें कीटों से सुरक्षित रहेंगी और उत्पादकता में लगभग 20% तक बढ़ोतरी संभव है। यह पहल खेती को रसायन-मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
गोशालाएं बनेंगी आत्मनिर्भर, महिलाओं को मिलेगा काम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोशालाओं को पंचगव्य उत्पादों के निर्माण और विपणन से आत्मनिर्भर बनाने का निर्देश दिया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
स्वयं सहायता समूहों को मिलेगी जिम्मेदारी
प्रत्येक जिले में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को पंचगव्य उत्पादों के निर्माण, प्रशिक्षण और विपणन का कार्य सौंपा जाएगा। किसानों को विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से गो-कृषि से जोड़ा जाएगा, जिससे उनकी आय भी बढ़ सके।
राज्यव्यापी निरीक्षण से तैयार हुई रणनीति
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के ओएसडी डॉ. अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि हाल ही में पशुधन, भूमि, जल स्रोत और गोशालाओं का निरीक्षण कर पंचगव्य इकाइयों की स्थापना के लिए व्यवहारिक योजना तैयार की गई है। योजना का क्रियान्वयन जल्द शुरू होगा।
स्थानीय विपणन और जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा
स्थानीय युवाओं को जैविक खाद और ग्रोथ प्रमोटर के विपणन से जोड़ा जाएगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। यह योजना पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को गति देने वाला एक अभिनव मॉडल बन सकती है।
