शिक्षा देश की संस्कृति के अनुरूप होनी चाहिए: डॉ. अतुल कोठारी

  • जबलपुर में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की राष्ट्रीय प्रांत संयोजक बैठक का शुभारंभ

जबलपुर। शिक्षा का स्वरूप केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहकर राष्ट्र की सांस्कृतिक परंपराओं और मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए। विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए शिक्षा का उद्देश्य तय किया जाना चाहिए। यह विचार शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने न्यास की राष्ट्रीय प्रांत संयोजक बैठक में व्यक्त किए।

डॉ. कोठारी ने बैठक में कहा, “न्यास पूरे देश में विद्यार्थियों को सहज रूप से जोड़ने का कार्य कर रहा है। ‘इंडिया’ नहीं, ‘भारत’ को अपनाने हेतु न्यास द्वारा राष्ट्रव्यापी हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है। यह सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि आंदोलन है।” उन्होंने आगे बताया कि समाज को शिक्षा क्षेत्र से जोड़ने के लिए चार बड़े ‘ज्ञान कुंभ’ आयोजित किए गए हैं, जिनमें प्रयागराज का ज्ञान महाकुंभ ऐतिहासिक रहा। इस आयोजन की सफलता के चलते न्यास को 2027 और 2028 के कुंभ में भी ज्ञान महाकुंभ आयोजित करने का आमंत्रण मिला है।

उन्होंने यह भी बताया कि न्यास हर पाँच वर्ष में एक चिंतन बैठक आयोजित करता है। आगामी चिंतन बैठक में देशभर के सेवाभावी, सामाजिक दृष्टिकोण रखने वाले शिक्षाविदों को आमंत्रित किया गया है। इसके साथ ही, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी वर्ष को लेकर कार्यकर्ताओं द्वारा किस प्रकार से उत्सव मनाया जाएगा, यह बैठक में तय किया जाएगा।

बैठक में भारतीय ज्ञान परंपरा, पर्यावरण संरक्षण, भारतीय भाषाओं के संवर्धन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के पूर्ण क्रियान्वयन जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा की गई। डॉ. कोठारी ने स्पष्ट किया कि जब तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति सम्पूर्ण राष्ट्र में प्रभावी ढंग से लागू नहीं होती, न्यास अपने अभियानों को जारी रखेगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत समय प्रबंधन में दक्षता विकसित करने का आह्वान भी किया।

बैठक के दौरान गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर के कुलपति डॉ. आलोक चक्रवाल ने न्यास एवं विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे नवाचारों की जानकारी साझा की। शुभारंभ समारोह शासकीय श्रमोदय आवासीय विद्यालय, जबलपुर में हुआ, जहां विद्यालय के प्राचार्य श्री साहिल शेख ने स्वागत भाषण दिया और विद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।

मंच पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय संयोजक श्री ए. विनोद, स्वामी विवेकानंद विश्वविद्यालय, सागर के कुलपति डॉ. अजय तिवारी, और लोक शिक्षण जबलपुर के संयुक्त संचालक श्री प्राचीश जैन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत राजेश पटेल, भूपेंद्र सलामे, डॉ. रज्जन द्विवेदी, सुखदेव वाजपेयी, धर्मेंद्र कुशवाह, अतीक खान, राजीव तिवारी, जगनदीप और मनोज पांडे ने किया। सरस्वती वंदना डॉ. प्रतीक्षा तिवारी ने प्रस्तुत की, जबकि कार्यक्रम का संचालन महाकौशल प्रांत संयोजक श्री निलेश पांडे ने किया। आभार भूपेंद्र सलामे ने व्यक्त किया।

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