जहरीले धुंए SMOG की चपेट में दिल्ली एनसीआर , इन बातों का रखें ख्याल

दिल्ली / गाज़ियाबाद/ ग्रेटर नोएडा : दिल्ली एनसीआर आज भी जहरीले स्मोक की चादर में लिपटा रहा। जहरीले स्मॉग की वजह से लोगों को सांस लेने में परेशानी के साथ-साथ लो विजिबिलिटी का सामना करना पड़ा। स्मोग की वजह से कई जगहों पर वाहन भी आपस में भिड़ गए। और तो और स्मोग के कारण दिल्ली व गाजियाबाद के स्कूलों में कक्षा नर्सरी से पांच तक की छुट्टी कर दी गई है। हालांकि नोएडा में प्राइमरी के स्कूल खुले रहे।

पिछले कई दिनों से जहरीले SMOG की वजह से हालत बिगड़ने लगी है। जहरीले स्मॉग से सुबह से शाम तक एनसीआर जहरीले धुंए के चादर में लिपटा हुआ है। प्रदूषण का स्तर इस कदर बढ़ गया है कि सांस लेना भी दूभर हो रहा है। जहरीले स्मॉग की वजह से दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण का स्तर इस कदर बढ़ गया है की प्राइमरी स्कूलों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी है। मौसम विभाग के वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी स्थिति सुधरने वाली नहीं है। आगामी 3 दिनों तक दिल्ली एनसीआर धुंए के चपेट में रहेगा।

इस मामले में जिला प्रदूषण अधिकारी बृजलाल अवस्थी ने कहा हवा के ना चलने से प्रदूषण का प्रकोप अधिक बढ़ गया है. यदि हवा चल जाए तो प्रदूषण अपने आप कम हो जाएगा। उन्होंने बताया कि अगले दो दिनों में प्रदूषण का प्रकोप कम हो जाएगा। उन्होंने बताया कि जिले में प्रदूषण का स्तर बढ़ाने वाली फैक्ट्रियां एवं संस्थान को चिन्हित किया जा रहा है। उनके खिलाफ कार्यवाही की जा रही है। अवस्थी ने कहा कि इसके लिए प्रदूषण विभाग द्वारा कई टीमों का गठन किया गया है जो मिलकर अभियान चला रहीं हैं। उन्होंने कहा प्रदूषण बढ़ाने वाली कंपनियों को किसी भी कीमत पर चलने नहीं दिया जाएगा।

इन बातों का रखें ख्याल :

 

Dr. Saurabh Srivastava
Dr. Saurabh Srivastava

शारदा हॉस्पिटल के प्रोफ़ेसर इंटरनल मेडिसिन डॉ सौरभ श्रीवास्तव ने बताया स्मॉग शब्द स्मोक और फॉग शब्दों को मिलकर बना है। खतरनाक गैसों और कोहरे के मेल से स्मॉग बनता है। जब गाड़ियों और फैक्टरियों से निकले धुएं में मौजूद राख, सल्फर, नाइट्रोजन, कार्बन डाई ऑक्साइड और अन्य खतरनाक गैसें कोहरे के संपर्क में आती हैं तो स्मॉग बनता है। इसका असर कई दिनों तक रह सकता है। इसका असर तेज हवा चलने या बारिश के बाद समाप्त होता है। जहां गर्मियों में वातावरण में पहुंचने वाला स्मोक ऊपर की ओर उठ जाता है वहीं ठंड में ऐसा नहीं हो पाता और धुंए और धुंध का एक जहरीला मिश्रण तैयार होकर सांस के साथ शरीर के अंदर पहुंचने लगता है। स्मॉग कई मायनों में स्मोक और फॉग दोनों से ज्यादा खतरनाक है।

 

 

स्मॉग से होने वाली परेशानियां :

शारदा स्कूल ऑफ़ मेडिसिन एन्ड हॉस्पिटल के प्रोफ़ेसर इंटरनल मेडिसिन डॉ सौरभ श्रीवास्तव ने बताया स्मोग के कारण आपको खांसी, ब्रॉन्काइटिस, दिल की बीमारी, त्वचा संबंधी रोग, बाल झड़ना, आंखों में जलन, नाक, कान, गला, फेफड़े में इंफेक्शन, ब्लड प्रेशर के रोगियों को ब्रेन स्ट्रोक की समस्या, दमा के रोगियों को अटैक पड़ सकता है।

स्मॉग से कैसे बचें

  • बीमार हों या स्वस्थ , स्मॉग के वक्त बाहर निकलने से बचें ।
  • अगर निकलना जरुरी हो जाये तो मास्क का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • सुबह के वक्त स्मॉग की मात्रा अधिक रहती है इसलिए बेहतर होगा सुबह 5-6 बजे की बजाय धूप निकलने के बाद करीब 8 बजे सुबह की सैर करें।
  • सर्दियों में जहां हवा ज्यादा प्रदूषित रहती है वहीं लोग पानी भी कम पीते हैं। यह खतरनाक साबित हो सकता है। दिन में तकरीबन 4 लीटर तक पानी पिएं। प्यास
  • लगने का इंतजार न करें कुछ वक्त के बाद 1-2 घूंट पानी पीते रहें।
  • घर से बाहर निकलते वक्त भी पानी पिएं। इससे शरीर में ऑक्सिजन की सप्लाई सही बनी रहेगी और वातावरण में मौजूद जहरीली गैसे अगर ब्लड तक पहुंच भी जाएंगी तो कम नुकसान पहुंचागी।
  • नाक के भीतर के बाल हवा में मौजूद बड़े डस्ट पार्टिकल्स को शरीर के भीतर जाने से रोक लेते हैं। हाईजीन के नाम पर बालों को पूरी तरह से ट्रिम न करें।
  • बाहर से आने के बाद गुनगुने पानी से मुंह, आंखें और नाक साफ करें। हो सके तो भाप लें।
  • अस्थमा और दिल के मरीज अपनी दवाएं वक्त पर और रेग्युलर लें। कहीं बाहर जाने पर दवा या इन्हेलर साथ ले जाएं और डोज मिस न होने दें। ऐसा होने पर अटैक पड़ने का खतरा रहता है।
  • साइकल से चलने वाले लोग भी मास्क लगाएं। चूंकि वे हेल्मेट नहीं लगाते इसलिए उनके फेफड़ों तक बुरी हवा आसानी से पहुंच जाती है।

इन लक्षणों के होते ही ध्यान दें

  • सांस लेने में तकलीफ होने पर या सीढ़ियां चढ़ते या मेहनत करने पर हांफने लगना
  • सीने में दर्द या घुटन महसूस होना
  • 2 हफ्ते से ज्यादा दिनों तक खांसी आना
  • 1 हफ्ते तक नाक से पानी या छींके आना
  • गले में लगातार दर्द बने रहना

बच्चों को रखें जरा बचा कर

  • 5 साल से कम के बच्चों की इम्यूनिटी काफी कमजोर होती है इसलिए उन्हें एयर पल्युशन से रिस्क ज्यादा होता है। इसलिए सर्दियों में उन्हें सुबह वॉक के लिए न ले जाएं।
  • अगर बच्चे स्कूल जाते हैं तो अटेंडेंट से रिक्वेस्ट कर सकते हैं कि बच्चों को मैदान में खिलाने की बजाए इनडोर ही खिलाएं।
  • धूल भरी और भारी ट्रैफिक वाली मार्केट्स में बच्चों को ले जाने से बचें।
  • टू वीलर में बच्चों को लेकर न निकलें।
  • बच्चों के कार में बाहर ले जाते वक्त शीशे बंद रखें और एसी चलाएं।
  • बच्चों को भी थोड़ी-थोड़ी देर पर पानी पिलाते रहें जिससे शरीर हाइड्रेट रहे और इनडोर पलूशन से होने वाला नुकसान भी कम हो।
  • बच्चे जब बाहर से खेल कर आएं तो उनका भी मुंह अच्छी तरह से साफ करें।

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